| फसल | किस्म | मंडी (APMC) | जिला | राज्य | न्यूनतम भाव ₹ | मोडल भाव ₹ | अधिकतम भाव ₹ | बदलाव | तारीख | ट्रेंड चार्ट |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| लहसुन | ऊपर | जलपाईगुड़ी | पश्चिम बंगाल | ₹13,500 | ₹13,700 | ₹13,900 | — | 07/07/2026 | ||
| लहसुन | ऊपर | जलपाईगुड़ी | पश्चिम बंगाल | ₹13,000 | ₹13,500 | ₹13,800 | — | 01/07/2026 | ||
| लहसुन | ऊपर | जलपाईगुड़ी | पश्चिम बंगाल | ₹13,000 | ₹13,500 | ₹14,000 | — | 25/06/2026 | ||
| लहसुन | लहसुन | जलपाईगुड़ी | पश्चिम बंगाल | ₹12,500 | ₹13,000 | ₹13,500 | — | 23/06/2026 |
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
लहसुन — आज राज्यवार भाव देखें
लहसुन आज का भावपूरे भारत में
आज कॉमन मार्केट (COMM) का भाव ₹0 प्रति क्विंटल (₹1 प्रति किलो) है। यह APMC बाजारों से प्राप्त कॉमन मार्केट का बाजार भाव है, जिसे भारत सरकार के ओपन डेटा प्लेटफॉर्म और eNAM (राष्ट्रीय कृषि बाजार) से प्रतिदिन अपडेट किया जाता है। क्या आप आज कॉमन मार्केट का भाव प्रति किलो जानना चाहते हैं? आज का ₹1/किलो का भाव आधिकारिक मॉडल (सबसे अधिक कारोबार वाला) भाव ₹0/क्विंटल से लिया गया है।
बाजार मूल्य प्रत्येक मंडी में सबसे अधिक प्रचलित दर होती है — जो किसानों और व्यापारियों के लिए सबसे विश्वसनीय संदर्भ है। न्यूनतम और अधिकतम मूल्य दैनिक व्यापार सीमा को दर्शाते हैं। परिवहन, आरहत (कमीशन) और हैंडलिंग शुल्क के कारण आपके स्थानीय बाजार में खुदरा मूल्य आमतौर पर 10-25% अधिक होते हैं।
त्वरित संदर्भ
लहसुन के बारे में — भारत का सबसे ज्वलनशील सब्जी-मसाला
भारत प्रतिवर्ष 3-4 मिलियन टन लहसुन का उत्पादन करता है और चीन के बाद विश्व का दूसरा सबसे बड़ा उत्पादक है। लहसुन रबी फसल (अक्टूबर-फरवरी में कटाई) है जिसे पूरे वर्ष आपूर्ति के लिए भंडारित किया जाता है। भारत मुख्य रूप से बांग्लादेश, मलेशिया, श्रीलंका और पूर्वी एशियाई बाजारों को लहसुन निर्यात करता है।
प्रमुख उत्पादक राज्य: मध्य प्रदेश (55% - मंदसौर, नीमच, रतलाम), राजस्थान, गुजरात, उत्तर प्रदेश और उड़ीसा। मप्र का मंदसौर एशिया की सबसे बड़ी लहसुन मंडी है।
कीमतों का व्यवहार: लहसुन की कीमतें बेहद अस्थिर होती हैं - कटाई के बाद अधिक उत्पादन होने पर ₹500 प्रति क्विंटल से लेकर कमी वाले वर्षों में ₹30,000 प्रति क्विंटल से अधिक तक। खराब मानसून (फसल क्षति), कोल्ड स्टोरेज की आपूर्ति और चीन तथा दक्षिण-पूर्व एशिया से निर्यात की मांग इसके प्रमुख कारक हैं।